‘एक ट्रोजन हॉर्स ने आईआईटी में सेंध लगा दी है’ शीर्षक वाले लेख में देश के प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्थानों, आईआईटी में ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस)’ के नाम पर मिथकों, किंवदंतियों और पारंपरिक मान्यताओं पर दिए जा रहे जोर पर चिंता व्यक्त की गई है। लेखक का मानना है कि शोध के नाम पर बिना वैज्ञानिक प्रमाणों के विषयों को बढ़ावा देना उच्च शिक्षा के मानकों के विरुद्ध है। उन्होंने सुझाव दिया कि आईआईटी को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शोध की स्वतंत्रता और प्रमाण-आधारित ज्ञान के केंद्र बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान का अध्ययन करना आवश्यक है, लेकिन इसे वैज्ञानिक जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।

क्या आईआईटी में ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली’ के नाम पर पौराणिक कथाओं का महत्व बढ़ रहा है?
‘एक ट्रोजन हॉर्स ने आईआईटी में सेंध लगा दी है’ शीर्षक वाले लेख में देश के प्रमुख तकनीकी शिक्षण संस्थानों, आईआईटी में ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस)’ के नाम पर मिथकों, किंवदंतियों और पारंपरिक मान्यताओं पर दिए जा रहे जोर पर चिंता व्यक्त की गई है। लेखक का मानना है कि शोध के नाम पर बिना वैज्ञानिक प्रमाणों के विषयों को बढ़ावा देना उच्च शिक्षा के मानकों के विरुद्ध है। उन्होंने सुझाव दिया कि आईआईटी को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शोध की स्वतंत्रता और प्रमाण-आधारित ज्ञान के केंद्र बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ज्ञान का अध्ययन करना आवश्यक है, लेकिन इसे वैज्ञानिक जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।

