✍️रेड्डी सत्य सुब्रमण्यम पुन्नमी, वरिष्ठ रिपोर्टर 998908608 स्वास्थ्य के लिए हम जिन गणनाओं को भूल चुके हैं: 1. सांस की गणना। एक व्यक्ति प्रति वर्ष 740 किलोग्राम ऑक्सीजन ग्रहण करता है। यह 7 बड़े पेड़ों द्वारा उत्पादित होती है। यदि आपकी आयु 40 वर्ष है, तो आप पर 280 पेड़ों का ऋण है। आपने कितने पेड़ों का ऋण चुकाया है? 2. पानी की गणना। चावल का एक दाना उगाने में 5 लीटर पानी लगता है। एक प्लास्टिक की बोतल को विघटित होने में 450 वर्ष लगते हैं। हम अधिक उपभोग करते हैं और कम लौटाते हैं। गणना का यह अंतर सूखे का कारण है। 3. मिट्टी की गणना। प्रकृति को एक इंच उपजाऊ मिट्टी बनाने में 500 वर्ष लगते हैं। हम रसायनों का प्रयोग करके इसे 5 मिनट में नष्ट कर रहे हैं। मिट्टी की मृत्यु का अर्थ है हमारे भोजन की मृत्यु। 4. शरीर की गणना। क्या आप जानते हैं कि योग करते समय जहरीली हवा में सांस लेना कैसा लगता है? यह एक बोतल में छेद को पानी से भरने जैसा है। सबसे पहले हवा को साफ करना जरूरी है। अगर हवा साफ होनी है, तो पेड़ होने चाहिए। त्यागने योग्य तीन बातें: 1. सब्जियों और दूध के प्लास्टिक के रैपर का इस्तेमाल न करें। कपड़े का थैला ही काफी है। 2. अनावश्यक यात्रा न करें: 2 किलोमीटर के दायरे में पैदल चलें। इससे प्रदूषण कम होगा और आपके पैर मजबूत होंगे। 3. अनावश्यक भोजन न खाएं: पैकेटबंद खाना, मैदा, ठंडे पेय। ये आपके शरीर के लिए भी कचरा हैं और धरती के लिए भी। अपनाने योग्य तीन बातें: 1. पेड़ की जिम्मेदारी निभाएं: अपने घर या स्कूल के पास एक पेड़ गोद लें। यह पेड़ आपके बच्चे की तरह रहेगा और जब तक वह जीवित रहेगा, तब तक आपके साथ रहेगा। 2. पानी की एक-एक बूंद बचाएं: नल के नीचे एक बाल्टी रखें। ब्रश करते समय उसमें पानी डालें। छोटी बचत, बड़े परिणाम। 3. एक हफ्ते तक हर हफ्ते सब्जियों के कचरे को खाद बनाएं। यह कचरा नहीं, बल्कि मिट्टी के लिए शक्ति है। याद रखें: पर्यावरण दूर का जंगल नहीं है। यह वह जमीन है जिस पर आप बैठते हैं। वह हवा है जिसमें आप सांस लेते हैं। वह पानी है जिसे आप पीते हैं। अगर आप इन्हें बचाएंगे, तो भविष्य सुरक्षित रहेगा। जन्मदिन की नई परिभाषा: केक काटो, लेकिन अपनी उम्र के बराबर के सारे पौधे एक ही दिन लगाओ। 40वां जन्मदिन? 40 पौधे। यही असली उत्सव है। यह धरती हमारी संपत्ति नहीं है। यह हमारे बच्चों का भरोसा है। इस भरोसे को धोखा नहीं देना चाहिए। अभी। एक कदम उठाओ। एक पौधा लगाओ। आने वाली पीढ़ी की सांसें आपके हाथों में हैं। आने वाली पीढ़ी को जीवन, सुरक्षा और भारतीयता के बारे में सिखाओ। 🙏 साधुजनः सुखिनोभवन्तु🙏 समाप्त



