इस लेख में कहा गया है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय लोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। चेन्नई के पल्लीकरनई आर्द्रभूमि का उदाहरण देते हुए इसमें बताया गया है कि नागरिक समाज, पर्यावरण कार्यकर्ता और वैज्ञानिक मिलकर काम करें तो प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी संरक्षण संभव है। इसमें सुझाव दिया गया है कि शहरी विकास योजनाओं में पर्यावरण प्रभाव आकलन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसमें कहा गया है कि भावी पीढ़ियों के हित के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है। इसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी महत्वपूर्ण है।
इस लेख में कहा गया है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय लोगों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। चेन्नई के पल्लीकरनई आर्द्रभूमि का उदाहरण देते हुए इसमें बताया गया है कि नागरिक समाज, पर्यावरण कार्यकर्ता और वैज्ञानिक मिलकर काम करें तो प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी संरक्षण संभव है। इसमें सुझाव दिया गया है कि शहरी विकास योजनाओं में पर्यावरण प्रभाव आकलन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसमें कहा गया है कि भावी पीढ़ियों के हित के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण आवश्यक है। इसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

