‘स्मार्ट’ सुझावों पर ‘किसान’ का गुस्सा… गोल्लापल्ली के किसान मल्लेश ने सरकार को चेतावनी दी! यूरिया का वितरण भी गैस सिलेंडरों की तरह ही होना चाहिए! अगर अधिकारी हरकत में नहीं आए तो ‘महा धरना’ अपरिहार्य है! कामारेड्डी, 22 जून, (पुन्नामी प्रतिनिधि): इतिहास में कोई भी सरकार किसानों को पहुँचाई गई कठिनाइयों से उबर नहीं पाई है, जबकि किसान देश की रीढ़ हैं! रामारेड्डी मंडल के गोल्लापल्ली गाँव के किसान रेड्डी मल्लेश ने ‘प्रजा दरबार’ को दिए एक साक्षात्कार में सरकार और अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वे प्रौद्योगिकी के नाम पर परिवार के मुखियाओं को परेशान करते हैं तो वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने वर्तमान में लागू ऑनलाइन यूरिया बुकिंग प्रणाली पर कटाक्ष किया। सबके स्मार्टफोन कहाँ हैं? क्या निरक्षर किसानों की कोई राय नहीं है? गोल्लापल्ली पत्रिका से बात करते हुए किसान मल्लेश ने कहा कि हर किसान के पास बड़ा स्मार्टफोन नहीं होता। अगर होता भी है तो गाँवों के कई किसान अशिक्षित हैं। किसानों को ऐसे ऐप डाउनलोड करने और उनके माध्यम से यूरिया बुक करने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि तकनीक के नाम पर किसानों को धमकाना उचित नहीं है। कुछ किसानों को यूरिया मिल रहा है, कुछ को नहीं! इस ऑनलाइन ऐप की खामियों के कारण, कुछ किसानों को समय पर यूरिया मिल रहा है, जबकि अन्य निराश होकर लौट रहे हैं। यह भेदभाव और कठिनाइयाँ किसानों को परेशान कर रही हैं। यूरिया के लिए गैस सिलेंडर वाला फॉर्मूला क्यों लागू नहीं होता? किसान मल्लेश ने सरकार को एक शानदार और सरल समाधान सुझाया। उन्होंने मांग की कि यूरिया को उसी तरह उपलब्ध कराया जाए जैसे देश भर के प्रत्येक घर के लिए टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके गैस सिलेंडर बुक किए जाते हैं। किसान आईडी: यह प्रत्येक किसान की पंजीकरण आईडी पर आधारित होनी चाहिए। एक कॉल से बुकिंग: एक ऐसी तकनीक लाई जानी चाहिए जो आम आदमी को समझ में आए, ताकि टोल-फ्री नंबर पर सिर्फ एक कॉल करके यूरिया बुक किया जा सके। तीन किस्तों में वितरण: सरकार को फसल के मौसम के दौरान किसानों द्वारा आवश्यक यूरिया को तीन किस्तों में सीधे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अधिकारियों की सुस्ती… ऐप्स की नाकामी! हालांकि कलेक्टर, आरडीओ, तहसीलदार और मंडल कृषि विस्तार अधिकारी (एईओ) जिले में जमीनी स्तर पर मौजूद हैं, लेकिन ऐप्स के प्रबंधन और वितरण की निगरानी में उचित कर्मचारियों की कमी एक बड़ी समस्या है। मल्लेश ने मांग की है कि इस बेकार ऐप नीति को तुरंत समाप्त किया जाए। अगर इसे दोबारा लागू किया गया, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा… ‘महा धरना’ दीजिए! मल्लेश ने किसानों के धैर्य की परीक्षा न लेने की चेतावनी दी है। उन्होंने सरकार को टोल-फ्री नंबर प्रणाली को तुरंत लागू करने और यूरिया के वितरण को चरणबद्ध तरीके से सुगम बनाने का अल्टीमेटम दिया है, अन्यथा वे राज्य भर के सभी किसानों को एकजुट करेंगे और बड़े पैमाने पर ‘महा धरना’ देंगे। यह देखना बाकी है कि उच्च अधिकारी और शासक किसानों की इन मांगों पर ध्यान देंगे या नहीं! और???

कोई ऐप नहीं, बस एक टोल-फ्री चुंबन! किसान कहता है
‘स्मार्ट’ सुझावों पर ‘किसान’ का गुस्सा… गोल्लापल्ली के किसान मल्लेश ने सरकार को चेतावनी दी! यूरिया का वितरण भी गैस सिलेंडरों की तरह ही होना चाहिए! अगर अधिकारी हरकत में नहीं आए तो ‘महा धरना’ अपरिहार्य है! कामारेड्डी, 22 जून, (पुन्नामी प्रतिनिधि): इतिहास में कोई भी सरकार किसानों को पहुँचाई गई कठिनाइयों से उबर नहीं पाई है, जबकि किसान देश की रीढ़ हैं! रामारेड्डी मंडल के गोल्लापल्ली गाँव के किसान रेड्डी मल्लेश ने ‘प्रजा दरबार’ को दिए एक साक्षात्कार में सरकार और अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर वे प्रौद्योगिकी के नाम पर परिवार के मुखियाओं को परेशान करते हैं तो वे चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने वर्तमान में लागू ऑनलाइन यूरिया बुकिंग प्रणाली पर कटाक्ष किया। सबके स्मार्टफोन कहाँ हैं? क्या निरक्षर किसानों की कोई राय नहीं है? गोल्लापल्ली पत्रिका से बात करते हुए किसान मल्लेश ने कहा कि हर किसान के पास बड़ा स्मार्टफोन नहीं होता। अगर होता भी है तो गाँवों के कई किसान अशिक्षित हैं। किसानों को ऐसे ऐप डाउनलोड करने और उनके माध्यम से यूरिया बुक करने में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि तकनीक के नाम पर किसानों को धमकाना उचित नहीं है। कुछ किसानों को यूरिया मिल रहा है, कुछ को नहीं! इस ऑनलाइन ऐप की खामियों के कारण, कुछ किसानों को समय पर यूरिया मिल रहा है, जबकि अन्य निराश होकर लौट रहे हैं। यह भेदभाव और कठिनाइयाँ किसानों को परेशान कर रही हैं। यूरिया के लिए गैस सिलेंडर वाला फॉर्मूला क्यों लागू नहीं होता? किसान मल्लेश ने सरकार को एक शानदार और सरल समाधान सुझाया। उन्होंने मांग की कि यूरिया को उसी तरह उपलब्ध कराया जाए जैसे देश भर के प्रत्येक घर के लिए टोल-फ्री नंबर पर कॉल करके गैस सिलेंडर बुक किए जाते हैं। किसान आईडी: यह प्रत्येक किसान की पंजीकरण आईडी पर आधारित होनी चाहिए। एक कॉल से बुकिंग: एक ऐसी तकनीक लाई जानी चाहिए जो आम आदमी को समझ में आए, ताकि टोल-फ्री नंबर पर सिर्फ एक कॉल करके यूरिया बुक किया जा सके। तीन किस्तों में वितरण: सरकार को फसल के मौसम के दौरान किसानों द्वारा आवश्यक यूरिया को तीन किस्तों में सीधे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अधिकारियों की सुस्ती… ऐप्स की नाकामी! हालांकि कलेक्टर, आरडीओ, तहसीलदार और मंडल कृषि विस्तार अधिकारी (एईओ) जिले में जमीनी स्तर पर मौजूद हैं, लेकिन ऐप्स के प्रबंधन और वितरण की निगरानी में उचित कर्मचारियों की कमी एक बड़ी समस्या है। मल्लेश ने मांग की है कि इस बेकार ऐप नीति को तुरंत समाप्त किया जाए। अगर इसे दोबारा लागू किया गया, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा… ‘महा धरना’ दीजिए! मल्लेश ने किसानों के धैर्य की परीक्षा न लेने की चेतावनी दी है। उन्होंने सरकार को टोल-फ्री नंबर प्रणाली को तुरंत लागू करने और यूरिया के वितरण को चरणबद्ध तरीके से सुगम बनाने का अल्टीमेटम दिया है, अन्यथा वे राज्य भर के सभी किसानों को एकजुट करेंगे और बड़े पैमाने पर ‘महा धरना’ देंगे। यह देखना बाकी है कि उच्च अधिकारी और शासक किसानों की इन मांगों पर ध्यान देंगे या नहीं! और???

