देश के आठ प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की विकास दर मई 2026 में मात्र 0.5 प्रतिशत तक सीमित रही। पिछले 21 महीनों में यह दूसरा सबसे निचला स्तर है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, आठ में से पांच क्षेत्रों में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, कोयला और उर्वरक क्षेत्रों में उत्पादन में गिरावट आई। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पश्चिम एशियाई संकट के प्रभाव से रिफाइनरी क्षेत्र प्रभावित हुआ है। हालांकि, इस्पात, सीमेंट और बिजली क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक उत्पादन में मंदी का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

प्रमुख क्षेत्रों में वृद्धि घटकर 0.5 प्रतिशत रह गई, जो चिंताजनक है।
देश के आठ प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की विकास दर मई 2026 में मात्र 0.5 प्रतिशत तक सीमित रही। पिछले 21 महीनों में यह दूसरा सबसे निचला स्तर है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, आठ में से पांच क्षेत्रों में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, कोयला और उर्वरक क्षेत्रों में उत्पादन में गिरावट आई। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पश्चिम एशियाई संकट के प्रभाव से रिफाइनरी क्षेत्र प्रभावित हुआ है। हालांकि, इस्पात, सीमेंट और बिजली क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज की गई। विश्लेषकों का मानना है कि औद्योगिक उत्पादन में मंदी का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

