कांग्रेस पार्टी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान छह भारतीय सैन्य कर्मियों की मौत पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस ने इस मामले में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। उसने सरकार पर संसद में सैनिकों की मौत के बारे में उचित जानकारी न देने और देश की जनता से तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के पूर्व सैन्य विंग के प्रतिनिधियों द्वारा आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा गया कि देश की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को उचित सम्मान देना सरकार का दायित्व है। उन्होंने आलोचना की कि पूर्व सरकारें शहीद हुए प्रत्येक सैनिक को आधिकारिक श्रद्धांजलि अर्पित करती थीं, लेकिन अब यह परंपरा टूट गई है। इस संदर्भ में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश की जनता को स्पष्टीकरण देने को भी कहा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस मुद्दे के राजनीतिक रूप से गरमाने की संभावना है। विभिन्न सूत्रों का मानना है कि सैनिकों के बलिदान का सम्मान राजनीति से परे होना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना पर संसद में भी चर्चा होने की संभावना है।

कांग्रेस का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर में सैनिकों की मौत के मामले में राजनाथ सिंह को इस्तीफा देना चाहिए।
कांग्रेस पार्टी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान छह भारतीय सैन्य कर्मियों की मौत पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस ने इस मामले में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। उसने सरकार पर संसद में सैनिकों की मौत के बारे में उचित जानकारी न देने और देश की जनता से तथ्यों को छिपाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस के पूर्व सैन्य विंग के प्रतिनिधियों द्वारा आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा गया कि देश की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को उचित सम्मान देना सरकार का दायित्व है। उन्होंने आलोचना की कि पूर्व सरकारें शहीद हुए प्रत्येक सैनिक को आधिकारिक श्रद्धांजलि अर्पित करती थीं, लेकिन अब यह परंपरा टूट गई है। इस संदर्भ में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश की जनता को स्पष्टीकरण देने को भी कहा है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस मुद्दे के राजनीतिक रूप से गरमाने की संभावना है। विभिन्न सूत्रों का मानना है कि सैनिकों के बलिदान का सम्मान राजनीति से परे होना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना पर संसद में भी चर्चा होने की संभावना है।

