पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा जैविक मसाला प्रसंस्करण केंद्र मेघालय में शुरू किया गया है, जिससे स्थानीय किसानों को नए अवसर मिलेंगे। इस केंद्र की क्षमता प्रति वर्ष 10,000 मीट्रिक टन मसालों को संसाधित करने की है। इसका उपयोग हल्दी, काली मिर्च और अन्य जैविक मसालों के प्रसंस्करण के लिए किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इससे लगभग 5,500 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन करके किसानों की आय में वृद्धि की काफी संभावना है। यह परियोजना पूर्वोत्तर के कृषि क्षेत्र के विकास में योगदान देगी।

मेघालय के जैविक मसाला उद्योग को नई गति मिली है।
पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा जैविक मसाला प्रसंस्करण केंद्र मेघालय में शुरू किया गया है, जिससे स्थानीय किसानों को नए अवसर मिलेंगे। इस केंद्र की क्षमता प्रति वर्ष 10,000 मीट्रिक टन मसालों को संसाधित करने की है। इसका उपयोग हल्दी, काली मिर्च और अन्य जैविक मसालों के प्रसंस्करण के लिए किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि इससे लगभग 5,500 किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन करके किसानों की आय में वृद्धि की काफी संभावना है। यह परियोजना पूर्वोत्तर के कृषि क्षेत्र के विकास में योगदान देगी।

