30 जून, 1926 को द हिंदू में प्रकाशित एक पुराने लेख में प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी सुज़ैन लेंगलेन के व्यवहार की कड़ी आलोचना की गई थी। उस समय के समाचार पत्रों और खेल विश्लेषकों ने टिप्पणी की थी कि विंबलडन टूर्नामेंट के दौरान उनका व्यवहार खेल भावना के विरुद्ध था। लेख में कहा गया था कि खिलाड़ियों को जीत के साथ-साथ अनुशासन, विनम्रता और अपने प्रतिद्वंद्वियों के प्रति सम्मान का भी पालन करना चाहिए। यह पुरालेखीय समाचार दर्शाता है कि उस युग में खेल नैतिकता को कितना महत्व दिया जाता था। यह लेख ऐतिहासिक घटनाओं को याद करते हुए बताता है कि खेलों में अनुशासन कितना महत्वपूर्ण है।

100 साल पहले: टेनिस स्टार सुज़ैन लेंगलेन के व्यवहार की कड़ी आलोचना हुई थी।
30 जून, 1926 को द हिंदू में प्रकाशित एक पुराने लेख में प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी सुज़ैन लेंगलेन के व्यवहार की कड़ी आलोचना की गई थी। उस समय के समाचार पत्रों और खेल विश्लेषकों ने टिप्पणी की थी कि विंबलडन टूर्नामेंट के दौरान उनका व्यवहार खेल भावना के विरुद्ध था। लेख में कहा गया था कि खिलाड़ियों को जीत के साथ-साथ अनुशासन, विनम्रता और अपने प्रतिद्वंद्वियों के प्रति सम्मान का भी पालन करना चाहिए। यह पुरालेखीय समाचार दर्शाता है कि उस युग में खेल नैतिकता को कितना महत्व दिया जाता था। यह लेख ऐतिहासिक घटनाओं को याद करते हुए बताता है कि खेलों में अनुशासन कितना महत्वपूर्ण है।

