नई दिल्ली, जनवरी (पुन्नामी विशेष संवाददाता) भारत में क्रेडिट कार्ड का उपयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन इन पर लगने वाली उच्च ब्याज दरें और जुर्माने आम आदमी पर भारी वित्तीय बोझ डाल रहे हैं। वर्तमान में, देश के कई बैंक और वित्तीय संस्थान क्रेडिट कार्ड पर 24 प्रतिशत से 48 प्रतिशत वार्षिक, और कुछ मामलों में 55 प्रतिशत से भी अधिक ब्याज दरें वसूल रहे हैं। समय पर बिलों का भुगतान न कर पाने वाले उपभोक्ताओं पर भारी जुर्माना और विलंब शुल्क लगने के कारण वे कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं। इससे विशेष रूप से मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवार प्रभावित हो रहे हैं। आवश्यक वस्तुओं के लिए लिया गया ऋण अंततः वित्तीय संकट की ओर ले जा रहा है। इस संदर्भ में, अमेरिका में उपभोक्ताओं को शोषणकारी ऋण प्रथाओं से बचाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेने का प्रयास किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि वहां की सरकार ने क्रेडिट कार्ड की ब्याज दरों को अधिकतम 10 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। इसे उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसी प्रकार, भारत में भी कई लोगों का मानना है कि क्रेडिट कार्ड की ब्याज दरों और जुर्माने पर अधिकतम सीमा निर्धारित करने की आवश्यकता है। वे मांग कर रहे हैं कि केंद्र सरकार आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए कड़े कदम उठाए। इस मुद्दे पर उपभोक्ताओं की ओर से केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को एक ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने आग्रह किया कि क्रेडिट कार्ड की ब्याज दरों पर नियंत्रण लाने से लाखों उपभोक्ताओं को वित्तीय सुरक्षा मिलेगी और एक जिम्मेदार बैंकिंग प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा।
